Wednesday, December 19, 2018

البوعزيزي: هل ما زالت شعلة جسده متقدة بعد مرور 8 سنوات على ثورة تونس؟

يصادف اليوم، الذكرى الثامنة لاندلاع ثورات الربيع العربي التي انطلقت شرارتها الأولى من تونس في 17 ديسمبر/كانون الأول 2010، عندما أضرم البوعزيزي النار بجسده، احتجاجاً على مصادرة البلدية لمصدر رزقه الذي كان عبارة عن عربة صغيرة لبيع الخضروات والفواكه عليها.
وكان طارق الطيب محمد البوعزيزي (مواليد سيدي بوزيد، 1984 ) المنحدر من أسرة فقيرة يعيش مع والدته و 8 إخوة وأخوات، أما والده، فمات عندما كان طفلاً صغيراً.
ولم يدرس البوعزيزي سوى المرحلة الابتدائية، إذ تفرغ للعمل كبائع متجول لبيع الخضار والفواكه منذ صغره.
لكن ذلك الحدث ليس ببعيد، فما زال العالم العربي في حالة اضطراب وقلق. سقطت أنظمة وبقيت أخرى تصارع من أجل البقاء كما هو الحال في ليبيا ومصر وسوريا واليمن.
انطلقت "ثورات الربيع العربي" من معاناة البوعزيزي الذي كان يبيع الخضروات على عربة يدفعها أمامه كل يوم لكسب رزقه، لكن السلطات المحلية حاولت مصادرتها، وهي التي كانت تمثل كل ثروته ورأسماله، بذريعة أنه كان يبيع في مكان غير مسموح به. وعندما امتنع عن التسليم، قوبل بصفعة على وجهه على الملأ من قبل الشرطية فادية حمدي، التي وبخته وقالت له بالفرنسية "  " أي إرحل.
أما صورة البوعزيزي وهو يحترق، فكانت أقوى تعبير عن عمق معاناته وألمه بسبب الأوضاع السيئة التي يعيشها، حاله كحال الغالبية في البلاد. وسرعان ما تحولت كلمة "إرحل" المطلب الأكثر انتشاراً في احتجاجا
تم استبدال اسم ساحة "7 نوفمبر" في سيدي بوزيد باسم ساحة " الشهيد محمد البوعزيزي"، وكان اسم الساحة 7 نوفمبر منذ 23 عاماً، تخليداً لليوم الذي تولى فيه الرئيس المخلوع زين العابدين بن علي منصب رئاسة البلاد عام 1987.
وسميت المستشفى التي نُقل إليها البوعزيزي باسمه بعد أن كان اسمها سابقاً " مركز الإصابات والحروق البليغة" التي كانت عبارة عن مركز إسعافي للحالات المستعجلة.
واختاره البرلمان الأوروبي في 27 أكتوبر/تشرين الأول 2011 للفوز بجائزة ساخاروف لحرية الفكر إلى جانب ثلاثة آخرين. وهذه الجائزة تُمنح لتكريم الأشخاص أو المؤسسات الذين كرسوا حياتهم للدفاع عن حقوق الإنسان وحرية الفكر، وتبلغ قمية الجائزة 50 ألف يورو، وسميت بهذا الاسم نسبة إلى المعارض السوفييتي أندريه سخاروف.
كما قام برتران دولانوي، رئيس بلدية العاصمة الفرنسية باريس بتسمية ساحة في وسط العاصمة باسم محمد البوعزيزي بحضور والدة البوعزيزي وأخته.
وقالت وقتها والدته عن التكريم وهي تبكي: " أنا فخورة بتكريم ابني الشهيد، الذي يعتبر تكريماً لكل شهيد ولكل من حمل مسؤوليةالثورة التونسية على ظهره، وهدية لكل الشعوب العربية التي تبحث عن حريتها وتحارب الظلم".
ورفض سالم شقيق محمد البوعزيزي عرضَين من رجلي أعمال لشراء عربة شقيقه، وفضل احتفاظ العائلة بها كذكرى لفقيدهم، أو وضعها في إحدى الساحات كمعلم في مدينة سيدي بوزيد.
بعد أن توفي البوعزيزي في 4 يناير/كانون الثاني 2011، بسبب الحروق البليغة التي غطت كامل جسده. أصبحت وفاته دافعاً أكبر لاستمرار المظاهرات الشعبية في عموم تونس، والتي أطاحت بزين العابدين بعد شهر واحد من حرق البوعزيزي لنفسه.
وامتدت احتجاجات التونسيين إلى جميع المدن وأدت إلى صدامات مع قوات الأمن وسقوط العديد من الجرحى والقتلى خلال تلك المظاهرات.
وفرَّ بن علي إلى السعودية بشكل مفاجئ في 14 يناير/كانون الثاني 2011. لتدخل تونس مرحلة مختلفة من تاريخ البلاد.
ت ومظاهرات التونسيين. ووصل صدى الكلمة إلى مصر وليبيا واليمن وسوريا وغيرها من البلدان التي ما زالت تعيش الاضطرابات والحرب والنزوح منذ ذلك الحين.
وأصبح حرق البوعزيزي لنفسه أسلوباً كرره أكثر من خمسين شخصاُ في مختلف البلدان العربية للتعبير عن رفضهم للظلم واللامساواة والإهانة.

Sunday, November 11, 2018

दिलबर' पर नोरा फतेही का डांस जाएंगे भूल, जब देखेंगे ये वीडियो

अगस्त में आई जॉन अब्राहम की फिल्म सत्यमेव जयते का सॉन्ग 'दिलबर' सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा. गाने में नोरा फतेही का शानदार बैली डांस देखने को मिला. ये नोरा के करियर का सबसे हिट नंबर है. गाने ने नोरा को खूब पॉपुलैरिटी दिलाई. अब सोशल मीडिया पर एक शख्स का दिलबर सॉन्ग पर वीडियो वायरल हो रहा है. कहना गलत नहीं होगा कि उसके डांस मूव्स देखकर आप एक बार को नोरा को भूल जाएंगे.
ये वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड हो रहा है.  नाम के यूजर ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, ''इसे देखने के बाद मैं दोबारा कभी दिलबर का ऑरिजनल वीडियो नहीं देखूंगा.''
वीडियो में व्हाइट शर्ट-पैंट पहने फॉर्मल लुक में नजर आ रहा ये शख्स किसी पार्टी या इवेंट में दिलबर सॉन्ग पर परफॉर्म कर रहा है. कमाल का डांस देख वहां मौजूद लोग हूटिंग कर रहे हैं. डांस मूव्स की बात करें तो इस शख्स ने नोरा को कड़ी टक्कर दी है. टिपिकल बॉलीवुड स्टाइल को शख्स ने बखूबी पकड़ा है. यही नहीं इस शख्स ने बैली डांस भी किया है. 
साल 1999 में आई फिल्म सिर्फ तुम के सुपरहिट हुए गाने 'दिलबर' को तकरीबन 20 साल बाद जॉन अब्राहम की फिल्म सत्यमेव जयते में रीमेक किया गया था. नोरा फतेही पर फिल्माए गए इस रीमेक सॉन्ग को भी खूब पसंद किया गया. लेकिन रीमेक के ऑर्जिनल सॉन्ग पर थि‍रकने वालीं सुष्मिता सेन को नया वर्जन पसंद नहीं आया.

केदारनाथ फिल्म "लव जिहाद" के आरोपों की वजह से इस वक्त विवादों में है. सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान स्टारर 'केदारनाथ' का ट्रेलर आज रिलीज किया जाएगा. टीजर पहले ही आ चुका है. इसे सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया गया था. टीजर में सारा और सुशांत की जबरदस्त केमिस्ट्री देखने को मिली थी.
ट्रेलर से पहले फिल्म का नया पोस्टर
ट्रेलर रिलीज से पहले निर्माताओं ने फिल्म का एक नया पोस्टर भी जारी किया है. निर्देशक अभिषेक कपूर ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर साझा किया. पोस्टर में सारा और सुशांत सिंह को फीचर किया गया है. 
पोस्टर साझा करते हुए अभिषेक ने लिखा, "प्यार की एक अद्भुत यात्रा, इबादत के दर से आगे. केदारनाथ का ट्रेलर आज रिलीज होगा!".
केदारनाथ का टीजर रिलीज होने के बाद से फिल्म के कंटेंट को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. उत्तराखंड में केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि फिल्म हिंदुओं की भावनाओं को आहत करती है इसलिए इस पर पूरी तरह से बैन लगना चाहिए. एक बीजेपी नेता ने सेंसर को चिट्ठी लिखकर फिल्म पर बैन लगाने की मांग भी की. आरोप है कि फिल्म में हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया जा रहा है. बताते चलें कि फिल्म की कहानी में नायक मुस्लिम है जिसे हिंदू लड़की से प्यार हो जाता है.    
प्राकृतिक आपदा पर है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी कुछ साल पहले केदारनाथ में आए प्राकृतिक आपदा में पनपी एक प्रेम कहानी को लेकर है. नायिका अपने घरवालों के साथ केदारनाथ की धार्मिक यात्रा पर आई है जहां, भारी बारिश और भूस्खलन के बाद तबाही मच जाती है. बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की मौत हो जाती है. हादसे से जुड़े कई दृश्यों को फिल्म के टीजर में दिखाया गया था. टीजर के अंत में एक सीन ऐसा भी है जिसमें सुशांत भगवान शिव के वाहन नंदी का सींग पकड़ कर बचने की कोशिश करते नजर आते हैं. नायक तबाही के बीच हर हाल में नायिका को बचाना चाहता है. आज ट्रेलर में फिल्म की कहानी को लेकर और खुलासे हो जाएंगे. 

Tuesday, October 9, 2018

#MeToo: आलोक नाथ की तबीयत बिगड़ी, प्रोड्यूसर विंटा नंदा ने लगाया था रेप का आरोप

अभिनेता आलोक नाथ पर राइटर और प्रोड्यूसर विंटा नंदा ने रेप का आरोप लगाया है. #MeToo कैंपेन के तहत जबसे संस्‍कारी बाबूजी के नाम से पहचाने जानेवाले एक्‍टर का नाम आया है सोशल मीडिया पर लोग जमकर उनकी आलोचना कर रहे हैं. अब खबरें हैं कि यौन उत्‍पीड़न के आरोपों में घिरे आलो‍क नाथ की तबीयत खराब हो गई है. कहा जा रहा है कि खुद पर लगे आरोपों के चलते आलोक नाथ की तबीयत खराब हो गई है. डॉक्‍टर ने उन्‍हें आराम करने की सलाह दी है. इस विवाद पर अब उनकी तरफ से उनके वकील अशोक सरावगी बात करेंगे.

सरावगी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा, आलोक नाथ की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए मीडिया उन्हें सहयोग करें. 1-2 दिन बाद खुद आलोक नाथ मीडिया से रूबरू होंगे.' आलोक नाथ ने विंटा नंदा द्वारा लगाये गये आरोपों का जवाब भी दिया था.
विंटा नंदा द्वारा लगाये गये आरोपों पर आलोक नाथ ने एबीपी न्‍यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा,' उन्‍हीं (विंटा) से पूछिये, आप मुझसे क्‍यों पूछ रहे हैं ? जो औरत कह दे वह ब्रह्म वाक्‍य है न ? मेरा पक्ष जानकर क्‍या करेंगे ? वह उनकी मानसिकता को दर्शाता है. मुझपर तो इल्‍जाम लग गया है, मगर वक्‍त के साथ सबकुछ साफ हो जायेगा. मैं इस बात से न तो इंकार कर रहा हूं और न ही हां कह रहा हूं. वो (रेप) तो हुआ होगा. यकीनन हुआ होगा लेकिन किसी और ने किया होगा. खैर इस बारे में मैं कुछ नहीं बोलना चाहता क्‍योंकि बात निकली है तो दूर तलक जायेगी.'

क्‍या है पूरा मामला ?

विंटा नंदा ने फेसबुक पर लिखा,' उन्‍होंने मेरे साथ शारीरीक दुर्व्‍यवहार किया जब मैं साल 1994 के एक मशहूर शो तारा के लिए काम कर रही थीं. उनकी पत्‍नी मेरी अच्‍छी दोस्‍त थी. हमारा एकदूसरे के घर में आना-जाना भी था.' विंटा ने ना सिर्फ अपनी बात लिखी बल्कि शो के दौरान शो की लीड एक्‍ट्रेस नवनीत निशान के साथ हुई घटना का भी खुलकर जिक्र किया. उन्‍होंने बताया कि एक सीन के दौरान वे शराब पीकर आये और शॉट के दौरान शो की नवनीत पर गिर पड़े. नवनीत ने उन्‍हें थप्‍पड़ मार दिया.

विंटा नंदा ने लिखा, ' एक बार मैं उनके घर पर पार्टी में गईं. देर रात दो बजे मैं वहां से निकल गई क्‍योंकि मुझे ठीक नहीं लग रहा था. मेरे ड्र‍िंक में कुछ मिला दिया गया था. मैं अकेले ही सड़क के किनारे चल पड़ी. कुछ दूर जाने पर एक कार मेरे पास आकर रूकी और उसने मुझे घर तक छोड़ने की बात कही. मैंने उस पर भरोसा किया और गाड़ी में बैठ गई. मैं बेहोश हो गई. मुझे हल्‍का याद है कि मेरे मुंह में शराब उड़ेली जा रही थी. गले दिन दोपहर को जब मैं उठी तो मुझे दर्द हुआ. सिर्फ मेरा रेप नहीं हुआ था मुझे मेरे घर लाकर बर्बाद किया गया था. मैं उठ नहीं पा रही थी.'मुंबई : देश में जारी #MeToo मुहिम के तहत मंगलवार को भी कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न या यौन दुर्व्यवहार के अनुभव साझा किए, जिसके लपेटे में केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर और फिल्म अभिनेता आलोक नाथ सहित मीडिया और मनोरंजन जगत के कई नामी-गिरामी चेहरे आए हैं. यौन उत्पीड़न की परिभाषा और उचित प्रक्रिया पर न्‍यूज रूम, ड्रॉइंग रूमों और सोशल मीडिया साइटों पर ‘मी टू' मुहिम के बारे में चल रही जोरदार बहस के बीच कई ऐसे पत्रकारों के नाम सामने आए हैं जिन पर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न या यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाये हैं.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने यौन उत्पीड़न की शिकार महिला पत्रकारों का पुरजोर समर्थन करते हुए मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे सभी मामलों में बिना भेदभाव के जांच करें. देश में प्रेस की आजादी के लिए निष्पक्ष, न्यायोचित और काम का सुरक्षित माहौल जरूरी है.
सबसे ज्यादा दहलाने वाला अनुभव लेखिका-निर्माता विंटा नंदा ने साझा किया है. उन्होंने ‘सबसे संस्कारी व्यक्ति' पर करीब 19 साल पहले उनसे बलात्कार करने का आरोप लगाया. गौरतलब है कि जानेमाने अभिनेता आलोक नाथ द्वारा फिल्मों एवं धारावाहिकों में अदा किए जाने वाले किरदारों के कारण उन्हें ‘संस्कारी व्यक्ति' के रूप में जाना जाता है.

सिने एवं टीवी कलाकार संगठन (सिन्टा) ने मंगलवार को कहा कि वह आलोक नाथ को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा. सिन्टा के महासचिव और अभिनेता सुशांत सिंह ने ट्वीट कर नंदा को लिखा, ‘‘प्रिय विन्ता नंदा, मुझे बहुत दुख है....दुर्भाग्यवश हमें उचित प्रक्रिया का पालन करना है। मैं आपसे अपील करता हूं कि आप इस घटिया प्राणी के खिलाफ शिकायत दाखिल करें। हम आपका पूरा समर्थन करते हैं.' ‘तारा' नाम के टीवी शो से चर्चा में आईं नंदा ने सोमवार की रात को फेसबुक पर लिखे एक लंबे पोस्ट में अपने साथ कथित तौर पर हुए यौन शोषण की विस्तार से जानकारी दी.

टीवी पर पिता, अंकल और दादा की संस्कारी छवि में दिखने के चलते आलोक नाथ को ‘‘सबसे संस्कारी व्यक्ति' कहा जाता है. नंदा ने आरोप लगाया कि आलोक नाथ को 1993 में ‘तारा' के सेट पर मुख्य अभिनेत्री नवनीत निशान से दुर्व्यवहार करने के बाद धारावाहिक से निकाल दिया गया था. इसके बाद उन्होंने एक से अधिक बार उन पर यौन हमला किया था. नंदा ने कहा कि इस घटना से उन्होंने अपना आत्म-सम्मान खो दिया था. वह चाहती हैं कि दोषी को सजा मिले.

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक लेखिका और एक इंसान के तौर पर अपना विश्वास खो दिया. इसने पूरी तरह मुझे बदल दिया...मैं चाहती हूं कि जिसने मेरे साथ ऐसा किया, उसे सजा मिले.' नंदा ने कहा कि आगे के कदम के बारे में फैसला करने के लिए वह अपने सलाहकारों से मिलेंगी. आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नाथ ने एबीपी न्यूज से कहा, ‘‘मैं न तो इन आरोपों को नकार रहा हूं और न ही इनसे सहमत हूं. यह (बलात्‍कार) हुआ तो होगा, लेकिन किसी और ने किया होगा. मैं अब इसके बारे में ज्‍यादा बात नहीं करना चाहता, क्‍योंकि अगर यह बाहर आएगा तो और भी खिंचेगा.'

उन्होंने कहा कि नंदा के आरोप आजकल चल रही ‘मीटू' मुहिम का नतीजा है। आलोक नाथ ने कहा, 'हालांकि, हम सिर्फ महिलाओं का ही पक्ष सुनते हैं क्‍योंकि उन्हें कमजोर माना जाता है.' नवनीत निशान ने भी नंदा का समर्थन किया और कहा, ‘‘मैं सवालों के घेरे में आए आदमी की चार साल की प्रताड़ना से थप्पड़ मारकर निपटी और फिर सब ठीक हो गया.'

मलयाली अभिनेता से सांसद बने मुकेश भी देश में चल रही ‘मीटू' मुहिम की चपेट में आए हैं. बॉलीवुड की एक महिला कास्टिंग डायरेक्टर ने आरोप लगाया कि वर्ष 1999 में एक टेलीविजन शो की शूटिंग के दौरान मुकेश ने उनके साथ बदसलूकी की थी. टेस जोसेफ ने मंगलवार को ट्विटर पर घटना की जानकारी देते हुए बताया कि धारावाहिक ‘कोटीस्वरन' की शूटिंग के दौरान ‘गॉड फादर' के अभिनेता ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था. केरल में सत्ताधारी माकपा के विधायक और कई लोकप्रिय टीवी शो के प्रस्तोता मुकेश ने इन आरोपों को नकारा और कहा कि उन्हें कार्यक्रम की शूटिंग के बारे में भी नहीं याद है.

लेखक-गीतकार वरुण ग्रोवर पर भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया लेकिन उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोप को जोरदार तरीके से खारिज किया. उन्होंने कहा कि इन आरोपों में कुछ भी सही नहीं है और खुद को सही साबित करने के लिए वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.

कॉमेडी शो पेश करने वाले ग्रुप एआईबी, अभिनेता-निर्देशक रजत कपूर और फिल्मकार विकास बहल पर भी यौन उत्पीड़न या यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं. मुंबई एकेडमी ऑफ मूविंग इमेज (मामी) ने घोषणा की कि आरोपों के मद्देनजर एआईबी की ‘चिंटू का बर्थडे' और रजत कपूर की ‘कड़क' को फेस्टिवल में प्रदर्शित नहीं करने का फैसला किया गया है. बहल भी अब कबीर खान की ‘83' से नहीं जुड़े होंगे. बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गज ‘मीटू' मुहिम में सामने आ रहे आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन बॉलीवुड अदाकारा ऐश्वर्या राय बच्चन ने मंगलवार को इस मुहिम का समर्थन किया. हालांकि, उन्होंने सामने आ रहे व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स असोसिएशन ने कहा कि उसने सामने आए मामलों पर गौर किया है और बहल को नोटिस जारी किया है. उसने कहा कि महिला कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए उसने महिला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन किया है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि वह मीडिया में सामने आए आरोपों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया में है. दूसरी ओर, कई लोगों ने ‘मीटू' मुहिम के बारे में नकारात्मक टिप्पणी भी की. भाजपा सांसद उदित राज ने ‘मीटू' मुहिम को ‘‘गलत चलन' करार दिया और सवाल किया कि 10 साल बाद किसी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाना कितना प्रासंगिक है.

‘मीटू' मुहिम के जोर पकड़ने के साथ ही कई चेहरे बेनकाब होने की संभावनाएं बलवती होती जा रही हैं. इस बीच, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने अभिनेता नाना पाटेकर से कहा है कि वह आयोग के सामने पेश हों या अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की ओर से उनके खिलाफ दाखिल यौन प्रताड़ना की शिकायत के सिलसिले में 10 दिनों के भीतर जवाब दें. महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने कहा कि उन्होंने दत्ता की शिकायत का संज्ञान लिया है और उनकी ओर से नामित लोगों को नोटिस जारी किया है.

Friday, September 28, 2018

शकील कुरैशी, पवन शर्मा, सूरत पुंडीर, तनुज सैणी, नितिन राव

जिला सिरमौर के हाटी समुदाय का मुद्दा छह दशक से भी अधिक समय से दिल्ली सरकार की फाइलों में अठखेलियां खेल रहा है। गिरिपार क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदों पर दशकों से पानी फिर रहा है। जनजातीय क्षेत्र के दर्जे को लेकर हाटी समुदाय के लोग छह दशक से भी अधिक से अपनी मांग प्रदेश व केंद्र सरकार तक पहुंचा रहे हैं, परंतु अभी भी गिरिपार क्षेत्र जनजातीय घोषित नहीं हो पाया है। हाटी समुदाय के करीब पौने तीन लाख लोग हर बार विधानसभा व लोकसभा चुनाव में एक बार अपनी मांग दोहराते हैं तथा उम्मीद की किरण उनको कहीं दूर नजर आती है। हैरानी की बात तो यह है कि पूरा गिरिपार क्षेत्र व उत्तराखंड का जोंसार बाबर क्षेत्र दोनों तमाम प्रक्रियाओं में एक साथ पले बड़े हैं तथा दोनों ही क्षेत्रों के रीति-रिवाज, रहन-सहन, सांस्कृतिक गतिविधियां हू-ब-हू एक समान हैं। उत्तराखंड के जोंसार बाबर की करीब 124 पंचायतें 1967 में ट्राइबल घोषित हो चुकी हैं, जबकि इसके बिलकुल सामांनातर गिरिपार क्षेत्र की 132 पंचायतें अभी भी ट्राइबल के लिए संघर्ष कर रही हैं।
पौने तीन लाख आबादी सुविधाओं से दूर
गिरिपार क्षेत्र करीब 1294 वर्ग मीटर में फैला हुआ है, जिसमें 132 पंचायतों के अंतर्गत करीब पौने तीन लाख की आबादी रहती है। गिरिपार क्षेत्र में अभी भी मूलभूत सुविधाओं से लोग कोसों दूर हैं। क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई व सड़क जैसी सुविधाओं की भारी कमी है। ऐसे में गिरिपार क्षेत्र के लाखों लोग लोकसभा चुनाव को लेकर फिर से आश्वस्त हैं कि केंद्र सरकार इस बार चुनाव से पूर्व गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को ट्राइबल घोषित करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री से दो बार मुलाकात
लोकसभा चुनाव के दौरान वर्तमान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नाहन प्रवास के दौरान गिरिपार क्षेत्र को पिछड़ा घोषित करने का आश्वासन दिया था, परंतु उस आश्वासन को भी पांच वर्ष का समय पूरा होने को है। गिरिपार क्षेत्र के लोग बेहद ही शांत स्वभाव के हैं। पिछले छह दशक से भी अधिक समय से लगातार इस मांग को प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाया जा रहा है। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हाटी समुदाय का एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला था। उस दौरान वर्ष 2011 में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के समक्ष भी केंद्रीय हाटी समिति के पदाधिकारियों ने यह मुद्दा उठाया था।
केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है फाइल
प्रदेश सरकार की ओर से गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की फाइल केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। केंद्रीय जनजातीय मंत्री इस मामले को लेकर आश्वासन दे चुके हैं, परंतु फाइल फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। रजिस्ट्रार गवर्नर ऑफ इंडिया आरजीआई के पास भी हाटी समुदाय के लोग गुहार लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिमला लोकसभा के सांसद वीरेंद्र कश्यप, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. राजीव सहजल, पच्छाद के विधायक सुरेश कश्यप, शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर, भाजपा के प्रदेश महामंत्री चंद्रमोहन ठाकुर ने इसी माह दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से गिरिपार के ट्राइबल मुद्दे को लेकर मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश सरकार की ओर से भी केंद्र सरकार से गिरिपार को ट्राइबल घोषित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के नेतृत्व में रखा गया।
जोंसार बाबर जैसा दर्जा मांग रहा हाटी समुदाय
केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डा. अमी चंद, उपाध्यक्ष सुरेंद्र हिंदोस्तानी व वेद प्रकाश ठाकुर, महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री, कोषाध्यक्ष अतर सिंह नेगी, मीडिया प्रभारी उदय राम शर्मा, सिरमौर युवा विकास मंच के अध्यक्ष सुनील ठाकुर व प्रदीप सिंगटा आदि लोगों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व गिरिपार क्षेत्र के पौने तीन लाख लोगों से जुड़ा हाटी समुदाय का मुद्दा केंद्र सरकार को प्रमुखता से विचार में लाना चाहिए। केंद्रीय हाटी समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जब एक समान भौगोलिक, सांस्कृतिक व सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं होने वाले उत्तराखंड के जोंसार बाबर क्षेत्र को 1967 में ट्राइबल घोषित किया जा चुका है, तो गिरिपार क्षेत्र के पौने तीन लाख लोगों के साथ आखिर कब तक अन्याय होगा।

स्कूल है…डिस्पेंसरी है…ड्यूटी देना कोई चाहता नहीं

आजादी के सात दशकों के बाद भी बड़ा भंगाल क्षेत्र में सड़क सुविधा न होने के चलते क्षेत्र में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है। क्षेत्र में भले ही प्रदेश सरकार ने एक हाई स्कूल मंजूर किया है, लेकिन दुर्गम क्षेत्र में कोई भी ड्यूटी को तैयार नहीं होता। इस स्कूल में गांव के करीब दो दर्जन बच्चे विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा ग्रहण करने के लिए रजिस्टर्ड हैं। पालमपुर के एक ही अध्यापक के सहारे स्कूल चल रहा है। साथ ही गांव में पढ़े-लिखे कुछ अन्य लोग भी बच्चों को पढ़ाते हैं। सर्दियों में बर्फबारी होने से पहले इस स्कूल के बच्चे भी बीड़ में पहुंच जाते हैं। बीड़ में ही इन विद्यार्थियों की आगामी पढ़ाई तथा परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा बड़ा भंगाल में किसी तरह का शिक्षण संस्थान नहीं है। दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल एक आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी है और यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़कर अन्य कोई भी स्टाफ नहीं है। डिस्पेंसरी में उपलब्ध दवाइयां चपरासी द्वारा ही लोगों को दी जाती हैं, लेकिन गांव में दवाइयों का भी अभाव रहता है, जिसके चलते बीमारी के दौरान क्षेत्र के लोग स्थानीय देवता तथा क्षेत्र में मिलने वाली जड़ी-बूटियों से ही इलाज करते हैं। बुखार तथा जुकाम होने की स्थिति में गुच्छी तथा काले जीरे का काढ़ा होता है। गंभीर बीमारी में मरीज कंधों पर लाए जाते हैं। क्षेत्र की गर्भवतियों के प्रसव मामले गांव की ही एक बुजुर्ग महिला चमारी देवी सुलझाती हैं। पशुपालन विभाग की डिस्पेंसरी का बोर्ड भी गांव में एक कमरे पर टांगा गया है। सर्दियों के मौसम में गांव की अधिकतर आबादी बड़ा भंगाल से पलायन कर बीड़ में रहती है। इस दौरान बड़ा भंगाल में कुछेक ही लोग अपने पशुआें तथा घरों की देखरेख के लिए रुकते हैं। गांव से बाहर अन्य क्षेत्रों में आपात स्थिति के दौरान संपर्क करने के लिए एक सेटेलाइट फोन उपलब्ध है।  यह फोन भी सोलर सिस्टम के माध्यम से चार्ज होता है तथा दिन भर इस फोन को सूरज की रोशनी में चार्ज किया जाता है, जिसके बाद यह केवल दो घंटे के लिए ही प्रयोग किया जाता है। मौसम खराब रहने की स्थिति में फोन चार्ज भी नहीं होता है।
निचली मंजिल में जानवर, ऊपर खुद का बसेरा
बड़ा भंगाल में लोग आज भी दीपक की लौ में जीवन बिता रहे हैं। इस क्षेत्र में 2008 तक एक पावर हाउस चलता था, लेकिन इसकी मोटर खराब होने के बाद प्रशासन ने उसे ठीक करवाकर पावर हाउस चलाने का कष्ट नहीं किया। लोग दस साल से अंधेरे में हैं। इस क्षेत्र में एक सेटेलाइट फोन है, जो कभी प्रशासन तक संदेश पहुंचाने का काम कर जाता है। इस क्षेत्र में लोग सजा ही काट रहे हैं। क्षेत्रवासी आज भी सड़क या पक्के मार्ग से महरूम हैं। इस क्षेत्र में सरकार न तो लोगों को सुविधा प्रदान कर रही है और न ही पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रही है। इस क्षेत्र में लाखों रुपए की फसलें या फल हर साल गल सड़ जाते हैं। लोगों को आज के दौर में भी अपने घरों में ही जानवर रखने पड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में लकड़ी के दोमंजिला मकान होते हैं। नीचे व धरातल की मंजिल में लोग जानवर रखते हैं, तो ऊपर की मंजिल में स्वयं रहते हैं। इस क्षेत्र में एक भी शौचालय नहीं बन पाया है।
मीलों पैदल, न रास्ता, न पगडंडी
बड़ा भंगाल प्रदेश का ऐसा दुर्गम क्षेत्र है, जहां कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद एक क्षेत्र ऐसा आता है, जहां दो गांवों में सैकड़ों लोग रहते हैं। इन दोनों गांवों का नाम बड़ा भंगाल है। यहां यही क्षेत्र है, जहां आबादी बसती है। इसके अलावा चारों तरफ पहाडि़यां ही पहाडि़यां हैं। इन पहाडि़यों को चीरते हुए इस क्षेत्र से रावी नदी निकलती है और आगे कुछ किलोमीटर दूर जाकर चंबा पहुंचती है। इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए होली (चंबा), बीड़-बिलिंग (बैजनाथ) और पतलीकूहल के रास्ते अपनाए जा सकते हैं। रास्ता बचा नहीं है, सिर्फ कल्पना और मैप का सहारा बचा है।

Friday, September 14, 2018

एडमिट कार्ड हुए जारी, रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा को लेकर है कोई समस्या तो यह रहा

रेलवे ने ग्रुप डी परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आज जारी कर दिए हैं। एडमिट कार्ड रेलवे की वेबसाइट  . . से डाउनलोड  ए जा सकते हैं। इसके साथ ही रेलवे ने एक हेल्प डेस्क लिंक भी जारी कर दिया है। 
 इस हेल्प डेस्क लिंक पर लॉग इन करके आप रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा से जुड़ी समस्या का समाधान पा सकते हैं। रेलवे ने 13 सितंबर को ही यह लिंक जारी किया है। इसमें लॉग इन करने के लिए आपको लॉगइन आईडी और पासवर्ड की जरूरत होगी। इसके अलावा आपको बता दें कि 16 अक्टूबर के बाद का आरआरबी ग्रुप डी भर्ती परीक्षा 2018 का शेड्यूल आज जारी होगा।सितंबर को सिर्फ उन अभ्यर्थियों (   ) की परीक्षा सिटी, डेट, शिफ्ट की सूचना जारी की गई है जिनकी परीक्षाएं 17 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच तय की गई है। यानी 16 अक्टूबर के बाद जिन उम्मीदवारों की परीक्षा होगी, उनकी सही परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की सूचना आज दी जाएगी। शेष उम्मीदवारों को आज पता चल जाएगा कि उनकी परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट कौन सा होगी। परीक्षा तिथि से चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। वर्ल्ड कप के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है। वर्ल्ड कप के आगाज के लिए कुछ महीने और बचे हैं और ऐसे में टीम इंडिया में महेंद्र सिंह धौनी की भूमिका को लेकर भी चर्चा गरम है। 2019 वर्ल्ड कप में ऋषभ पंत पर दांव लगाया जाए, या महेंद्र सिंह धौनी को बरकरार रखा जाए, इस पर वीरेंद्र सहवाग ने बेबाकी से अपनी राय रखी है।
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज सहवाग ने धौनी के 2019 में होने वाले वर्ल्ड कप तक भारत की वनडे टीम का हिस्सा बने रहने का समर्थन किया है। सहवाग ने कहा, 'हालांकि धौनी अगले वर्ल्ड कप के फाइनल तक 38 साल के हो जायेंगे लेकिन उनका वनडे करियर शानदार रहा है जिसमें उनके नेतृत्व में भारतीय टीम का 2011 में वर्ल्ड कप जीतकर चैंपियन बनना भी शामिल है।'
गौरतलब है कि इंग्लैंड में हाल ही में खेली गई वनडे सीरीज के दौरान धौनी के प्रदर्शन को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी। टीम मैनेजमेंट की ओर से इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में शतक लगाने वाले युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को धौनी की जगह वनडे टीम में शामिल किया जा सकता है।
'धौनी का टीम में बने रहना जरूरी'
धौनी के पूर्व साथी खिलाड़ी सहवाग का मानना है कि पूर्व कप्तान धौनी का अगले वर्ल्ड कप तक भारत की वनडे टीम में बने रहना जरूरी है। सहवाग ने कहा, 'मेरी निजी राय में एम एस धौनी को वर्ल्ड कप 2019 तक टीम का हिस्सा बने रहना चाहिए।' सहवाग ने कहा, 'अगर आप ऋषभ को अभी से खिलाना शुरू करते हैं तो भी वो वर्ल्ड कप तक 15-16 वनडे मैच ही खेल पाएंगे जो कि धौनी की तुलना में काफी कम है, जिन्होंने 300 से भी अधिक वनडे मैच खेले हैं। मैं चाहता हूं कि धौनी ही वर्ल्ड कप में खेलें।'
भारतीय टीम के पूर्व ओपनर सहवाग ने कहा, 'पंत ऐसे खिलाड़ी हैं जो छक्के मार सकते हैं लेकिन जब आप धौनी की बात करेंगे तो उन्होंने अकेले ही देश को कई मैच जिताए हैं। मैं चाहूंगा कि धौनी के संन्यास लेने के बाद पंत ही उनकी जगह लें।' सहवाग ने कहा कि धौनी के पास 15 सितंबर से शुरू हो रहे एशिया कप में प्रदर्शन कर अपने आलोचकों को जवाब देने का अच्छा मौका है।
विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया लंबे समय से टेस्ट में नंबर-1 टीम बनी हुई है। इंग्लैंड में पांच मैचों की सीरीज में 1-4 से मिली हार के बाद से ही विराट की कप्तानी पर सवाल उठने भी शुरू हो गए हैं। पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर के मुताबिक अभी कप्तानी के बारे में विराट को काफी कुछ सीखना है।
गावस्कर को लगता है कि विराट को इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद तकनीकी पहलुओं के बारे में काफी कुछ सीखने की जरूरत है। गावस्कर ने इंडिया टुडे न्यूज चैनल से कहा, 'उसको (विराट) अभी काफी कुछ सीखने की जरूरत है। जैसे कि हमने पहले दक्षिण अफ्रीका में देखा और अब इंग्लैंड में भी, ऐसे कुछ मौके आए जब उसके द्वारा लगाई गई फील्डिंग या समय पर गेंदबाजी में बदलाव से काफी बड़ा अंतर आ सकता था। फिर से इसकी कमी दिखायी दी। उसने जब से कप्तानी संभाली है, तब से दो साल (उसने चार साल पहले कप्तानी संभाली थी) ही हुए हैं इसलिए कभी कभार अनुभव की कमी दिखायी देती है।'
हालांकि लिटिल मास्टर ने कोहली की एक रिपोर्टर के सवाल पर प्रतिक्रिया को तवज्जो नहीं दी जिसमें इस रिपोर्टर ने पूछा था कि क्या वो कोच रवि शास्त्री के उस बयान से सहमत हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि यह पिछले 15 साल में विदेश का दौरा करने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम है। ये पूछने पर कि क्या पत्रकार द्वारा पूछा गया ये सवाल 'जायज था' तो गावस्कर ने कहा कि उन्हें लगता है कि इस पूछने का समय गलत था।
गावस्कर ने कहा, 'उससे ये सवाल पूछने का समय गलत था। वो (विराट) हार से काफी आहत होगा। हो सकता है कि रिपोर्टर का ये सवाल पूछना जायज हो लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई भी कप्तान यह कहेगा कि तुम सही हो, लेकिन हम गलत हैं।' इस महान सलामी बल्लेबाज ने कहा कि किसी को इस घटना को ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहिए।
गावस्कर ने कहा, 'उसकी टीम 1-3 से पिछड़ रही थी और शायद वो इस सीरीज का अंत जीत से करना चाहता था। मुझे नहीं लगता कि हमें विराट की प्रतिक्रिया को भी ज्यादा तवज्जो देनी चाहिए। ये स्पष्ट था कि जो कुछ भी हुआ, उससे कप्तान निराश था और शायद उसने उसी लहजे में जवाब दिया।' उन्हें ये भी लगता है कि मुख्य कोच शास्त्री का इरादा बीते समय की टीमों को तिरस्कृत करने का नहीं था, बस अपने खिलाड़ियों से बात करने के लिए ऐसा किया गया था।
गावस्कर ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो, रवि (शास्त्री) ने ऐसा कहा होगा (पिछले 15 साल में दौरा करने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम) ताकि टीम का मनोबल बढ़ सके। मुझे नहीं लगता कि वो पिछली टीमों को बेकार बताने की कोशिश कर रहे थे। मेरा मानना है कि कोच की मंशा यह नहीं थी।'

Monday, September 10, 2018

चीन के कर्ज़-जाल में फंस रहे हैं उसके पड़ोसी देश

चीन अपनी महत्वकांक्षी वन बेल्ट वन रो़ड़ परियोजना के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है.
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) नामक इस परियोजना को शुरू हुए पांच साल हो चुके हैं, हालांकि चीन के लिए इसे मूर्त रूप देना इतना आसान भी नहीं रहा है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 7 सितंबर 2013 को कज़ाखिस्तान की नज़रबयेव यूनिवर्सिटी में एक भाषण देते हुए इस परियोजना की घोषणा की थी.
तब से लेकर अब तक इसमें दुनिया के 70 से अधिक देश जुड़ चुके हैं.
चीन के राष्ट्रपति इस परियोजना को 'प्रोजेक्ट ऑफ़ द सेंचुरी' बता चुके हैं.
हालांकि भारत ने खुद को चीन की इस परियोजना से अलग किया हुआ है, लेकिन भारत के अलावा उसके कई पड़ोसी देश इस परियोजना में चीन के साथ हैं.
दरअसल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बीआरआई का स्वागत उन देशों ने ज़्यादा किया जहां का आधारभूत ढांचा बहुत अच्छा नहीं था.
इन देशों में चीन ने रेलवे, सड़क और बंदरगाहों के निर्माण की कई योजनाएं शुरू की.
लेकिन अब कई देश ऐसे हैं जो इस परियोजना में शामिल होने के बाद कुछ प्रोजेक्ट के बारे में दोबारा विचार कर रहे हैं, इन देशों में मलेशिया से लेकर म्यांमार तक शामिल हैं.
चीन ने अपनी तरफ से काफी कोशिश की है कि वह परियोजना में शामिल देशों को यह समझा सके कि यह कितने फ़ायदे का सौदा है, लेकिन फिर भी कई एशियाई देश इसकी आलोचना कर रहे हैं.
इसके पीछे प्रमुख वजह चीन का इन देशों में फ़ैलता कर्ज़ का जाल है. आरआई परियोजना से पीछे हटने वाला सबसे नया देश मलेशिया है. जुलाई महीने में मलेशिया ने अपने देश में इस परियोजना के तहत चल रहे कुछ कामों को रोक दिया.
रोक लगाने वाली योजनाओं में 20 अरब डॉलर की ईस्ट-कोस्ट रेल लिंक और गैस पाइपलाइन की दो योजनाएं शामिल हैं.
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद पिछले महीने चीन के दौरे पर गए थे लेकिन उस दौरे में भी इस समझौते को जारी रखने पर सहमति नहीं बन पाई.
एशिया के दूसरे देशों में चल रही इस परियोजना पर भी अब ख़तरे के बादल मंडराने लगे हैं.
आखिर क्या वजह है कि चीन की इस महत्वकांक्षी परियोजना पर एशिया के देश अब इक़बाल नहीं कर पा रहेःरीलंका में चीन का निवेश अब जांच के दायरे में आने लगा है. खासतौर पर पश्चिमी मीडिया और अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाए हैं.
इनका आरोप है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ कर्ज़ बढ़ाने वाली कूटनीति कर रहा है.
पिछले साल ही श्रीलंका ने अपना हम्बनटोटा बंदरगाह चीन की एक फ़र्म को 99 साल के लिए सौंप दिया था. दरअसल श्रीलंका चीन की तरफ से मिले 140 करोड़ डॉलर का कर्ज़ चुका पाने में नाकाम था.
इसके बाद 5 सितंबर को विपक्ष के हज़ारों नेताओं ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर देश की संपत्ति बेचने का आरोप लगाया.
इसी तरह श्रीलंका में चीन के एक और प्रोजेक्ट पर खतरा मंडरा रहा है, श्रीलंका के उत्तरी शहर जाफ़ना में घर बनाने की चीन की योजना का विरोध हो रहा है. यहां लोगों ने कंक्रीट के घर की जगह ईंट के घरों की मांग की है.
चीन के सबसे करीबी और भरोसेमंद एशियाई दोस्त के तौर पर पाकिस्तान को देखा जाता है. पाकिस्तान चीन के साथ अपनी मित्रता को 'हर-मौसम में चलने वाली दोस्ती' के रूप में बयां करता है.
लेकिन बीआरआई परियोजना के संबंध में पाकिस्तान ने भी थोड़ा-थोड़ा नाराज़गी ज़ाहिर करना शुरू कर दिया है.
दरअसल पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या उसका बढ़ता कर्ज़, पारदर्शिता का अभाव और सुरक्षा व्यवस्था है.
बीआरआई के तहत चीन-पाकिस्तान के बीच एक आर्थिक गलियारा बनाने पर काम हो रहा है, इसके लिए कुल 6 हज़ार करोड़ डॉलर का खर्च सुनिश्चित हुआ है. पाकिस्तान के लिए यही रकम जी का जंजाल बन रहा है.
पाकिस्तान में नई सरकार बनाने वाली पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के सांसद सैयद शिबली फ़राज़ ने सऊदी की एक वेबसाइट अरब न्यूज़ से कहा है कि पिछली सरकार ने उनके साथ इस आर्थिक गलियारे से जुड़ी योजना की कोई जानकारी साझा नहीं की है.
उन्होंने साथ ही कहा कि नई सरकार इस समझौते पर दोबारा विचार विमर्श करेगी.
हालांकि फिलहाल पाकिस्तान की जैसी आर्थिक हालत चल रही है और अमरीका की तरफ से उन पर लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है, उस हाल में पाकिस्तान चीन के साथ किसी तरह का मनमुटाव नहीं करना चाहेगा.

Thursday, September 6, 2018

温家宝再次延后怒江大坝工作

据《南华早报》报道,中国总理温家宝再次叫停受争议的怒江(萨尔温江)水坝建设项目,以审慎对待中国最后一条自由流动的水道。报道称,今年四月,温家宝下令暂停云南六库水电站的建设工作,并呼吁投入更多的环境评估。

据该报纸称,温家宝告知有关部门在充分了解大坝对生态和当地社区的影响之前,不能重新启动大坝的建设。由于该项目的“影响深远”,温家宝说,有关部门应“广泛听取民意,深入研究,谨慎决定”。

这是温家宝第二次呼吁搁置六库建设计划。 2004年2月,在舆论哗然过后,他要求在社会和环境影响得到“认真讨论和科学论证”之前,项目必须暂时搁置下来。

云南省政府与国有电力巨头“华电集团”计划在怒江中下游建设13座大坝,其发电总能力将达到21320兆瓦,约等于三峡大坝发电量的17%。

当地官员称,利用河水发电对当地实现普遍脱贫来说至关重要。然而,附近村庄都在抱怨对村民强行的迁移和不公平的补偿。除了忽视对社区的严重影响,反对者还认为,该提案没有考虑到河流独特的生态系统。“下游社区”、联合国教科文组织也均对此表示反对。
据路透社报道,中国针对一份先前提交给联合国的文件进行重申,呼吁富裕国家到2020年将温室气体排放量在1990年水平上至少削减40%。在声明中,负责制定中国气候政策的国家发改委表示,新的全球气候协议必须保证发达国家“提高量化减排目标”。

这份新文件还表示,发达国家应该拿出0.5%到1%的年经济值支持其他国家减排及应对全球变暖。今年12月在哥本哈根举行的联合国气候大会上,将针对2020年《京都议定书》到期后的协议进行一系列的谈判,而目前这份声明详细表明了中国的立场。

其中一项显然针对美国的要求称,新协议应该“保证尚未批准《京都议定书》的发达国家承担相应的和相关的减排义务”。

中国的最新声明还表示, 中国和其他发展中国家有权寻求对抗气候变化和自身发展的平衡。来自能源研究所的专家对官方报纸《中国日报》说,与气候变化息息相关的主要温室气体是二氧化碳,而中国的二氧化碳排放量很可能持续增长到2035年。他们敦促政府应为支持低碳经济,控制全球变暖,提供大量的预算资金。

专家们说中国的二氧化碳排放量可能在2010年达到55亿吨,到2035年将达到88亿吨。“但是从2035年到2050年,”该报引述他们所说,“如果配合适当的技术,排放量将保持稳定或略有下降。”但该报道并没有说明这个预测成立的假设条件。 据美联社援引联合国的一份报告说,中国在湄公河上游的大坝建设对河流的将来构成了巨大的威胁。湄公河是世界主要水道和重要的地区水源。与此同时,老挝也已经动工在湄公河及其支流上建设大坝,而且柬埔寨和越南也有建设计划。
联合国的该报告称,“中国计划在湄公河上游流经云南省高峡段建设大规模的8个梯级水坝,但是该雄心勃勃的计划有可能对湄公河构成最大的威胁”。同时,该报告补充了大坝建设的影响,包括“可能引起河水流量和时间的变化,水质恶化以及生物多样性损失”。

但是,报告的作者之一 S  说:“湄公河目前的状况非常好,可以承受更多压力,如灌溉和工业开发。”河流污染程度并没有达到“警戒线”,也没有出现水资源短缺或由水引起的冲突。

据报告称,湄公河流域的一些地区正受到由于发展和水需求上涨带来的威胁。这样的地区包括柬埔寨的洞里萨,老挝的南康和越南境内的

中国外交部发言人马朝旭说中国政府对湄公河(在中国称之为澜沧江)的态度是开发和保护并重, 他说:“我想指出的是,我国政府非常重视跨国河流的勘探和保护,并以此贯彻开发和保护并重的政策。”